Monday, May 11, 2026
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भारत ने मांगा था सीज़फायर? पाक सेना प्रमुख Asim Munir के दावों पर बढ़ा विवाद

पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर बड़ा बयान दिया है। रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सेना मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ सैन्य संघर्ष केवल दो देशों की लड़ाई नहीं था, बल्कि “दो विचारधाराओं के बीच निर्णायक युद्ध” था।

आसिम मुनीर ने कहा कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की सैन्य रणनीति भारत की रणनीति से बेहतर साबित हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत ने अमेरिका के माध्यम से पाकिस्तान से सीज़फायर की मांग की थी। हालांकि भारत पहले ही इस दावे को खारिज कर चुका है और साफ कहा है कि सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधी बातचीत के बाद लिया गया था।

दरअसल, 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में भारत ने 6 और 7 मई की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया। भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद नौ आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी, जिसमें करीब 100 आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया।

भारत की इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया। पाकिस्तान की ओर से भी जवाबी हमले किए गए, लेकिन भारतीय सेना ने अधिकांश हमलों को नाकाम कर दिया। लगातार बढ़ते तनाव के बीच 10 मई 2025 को दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हॉटलाइन पर बातचीत हुई, जिसके बाद सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी।

अपने संबोधन में आसिम मुनीर ने आरोप लगाया कि भारत ने पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया था। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने “पूर्ण राष्ट्रीय एकता और सैन्य शक्ति” के साथ जवाब दिया। पाक सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने संघर्ष के दौरान 26 ठिकानों को निशाना बनाया था, हालांकि उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया।

भारत ने पाकिस्तान के इन आरोपों और दावों को पहले भी खारिज किया है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि भारत की कार्रवाई केवल आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ थी और इसका उद्देश्य सीमा पार आतंकवाद को रोकना था।

भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और लगातार आ रहे बयानों ने एक बार फिर दोनों देशों के रिश्तों को चर्चा में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर असर डाल सकते हैं।

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