दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही मिठाइयों और पारंपरिक पकवानों की मांग तेजी से बढ़ने लगी है। बाजारों में लड्डू, चिवड़ा और तरह-तरह के दिवाली फराल की बिक्री शुरू हो चुकी है। लेकिन त्योहारों की इस मिठास के बीच मिलावट का खतरा भी बना रहता है। इसी को देखते हुए महाराष्ट्र के पुणे में खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच तेज कर दी है। इस बार कार्रवाई की चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने खुद लड्डू तोड़कर उनकी जांच की। आखिर उन्होंने लड्डू में क्या देखा और खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर प्रशासन कितना सतर्क है?
दरअसल, एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने ‘द पूना मर्चेंट चैम्बर्स’ के वार्षिक लड्डू-चिवड़ा बिक्री कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस आयोजन में दिवाली के पारंपरिक फराल की बिक्री की व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम के उद्घाटन के तुरंत बाद मुंढे ने वहां उपलब्ध खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच शुरू कर दी।
इस दौरान उन्होंने खुद अपने हाथों से एक लड्डू तोड़कर उसकी बनावट और गुणवत्ता को देखा। उन्होंने यह जांचने की कोशिश की कि लड्डू तैयार करने में किस तरह के तेल का इस्तेमाल किया गया है और उसमें किसी प्रकार के हानिकारक या कृत्रिम रंगों की मिलावट तो नहीं है। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर उनकी इस सक्रियता ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा।
दरअसल, दिवाली के दौरान बाजारों में मिठाइयों और नमकीन की बिक्री सामान्य दिनों के मुकाबले काफी बढ़ जाती है। अधिक मांग के कारण कुछ जगहों पर मिलावटी खाद्य सामग्री या घटिया गुणवत्ता वाले तेल के इस्तेमाल की आशंका भी बनी रहती है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि लोगों तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ पहुंचें।
एफडीए पुणे में दिवाली फराल की बिक्री शुरू होने से पहले ही खाद्य पदार्थों की शुद्धता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रहा है। विभाग की कोशिश है कि त्योहार के दौरान लोगों को मिलावट से बचाया जा सके और दुकानदार निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करें।
कार्यक्रम के आयोजकों की ओर से खाद्य एवं औषधि प्रशासन की गाइडलाइंस का पालन करने पर तुकाराम मुंढे ने उनकी सराहना भी की। उन्होंने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने और सुरक्षित बिक्री व्यवस्था के महत्व पर जोर दिया।
फिलहाल दिवाली से पहले पुणे में खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सक्रियता बढ़ गई है। लड्डू और चिवड़ा जैसे पारंपरिक पकवानों की खरीदारी करते समय उपभोक्ताओं को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। अब देखना होगा कि त्योहार के दौरान एफडीए की जांच और निगरानी से बाजार में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में कितनी मदद मिलती है।
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