भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में देश लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। इसी बीच केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 67 अरब डॉलर का निवेश आया है। यह निवेश देश में स्वच्छ ऊर्जा के बढ़ते महत्व और इस क्षेत्र में निवेशकों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है। इसके साथ ही भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली क्षमता बढ़कर 310 गीगावाट तक पहुंच गई है।
नई दिल्ली में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026 को संबोधित करते हुए प्रल्हाद जोशी ने कहा कि भारत का स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि सितंबर 2024 में देश की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित क्षमता 200 गीगावाट से कुछ अधिक थी, जो अब बढ़कर 310 गीगावाट हो गई है। यानी पिछले दो वर्षों में इसमें करीब 110 गीगावाट की वृद्धि दर्ज की गई है।
मंत्री के मुताबिक, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में आया 67 अरब डॉलर का निवेश किसी एक क्षेत्र में हुए बड़े निवेशों में शामिल है। उन्होंने निवेशकों से भारत में निवेश जारी रखने और देश के विकास में भागीदार बनने की अपील भी की। उनका कहना था कि भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में स्वच्छ ऊर्जा की भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण होगी।
सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय विस्तार किया है। प्रल्हाद जोशी के अनुसार, वर्ष 2014 में देश की सौर ऊर्जा क्षमता महज 2.8 गीगावाट थी, जो बढ़कर 171 गीगावाट हो गई है। इसी तरह पवन ऊर्जा क्षमता भी 21 गीगावाट से बढ़कर 60 गीगावाट तक पहुंच गई है। ये आंकड़े देश में सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन के बढ़ते दायरे को दर्शाते हैं।
सिर्फ बिजली उत्पादन ही नहीं, बल्कि सौर उपकरणों के घरेलू निर्माण में भी भारत ने अपनी क्षमता बढ़ाई है। मंत्री ने बताया कि सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता दो गीगावाट से बढ़कर 225 गीगावाट हो गई है। वहीं, सौर सेल निर्माण क्षमता शून्य से बढ़कर 45 गीगावाट तक पहुंच गई है। पवन टर्बाइन निर्माण क्षमता भी 10 गीगावाट से बढ़कर 24 गीगावाट हो गई है।
स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में इसकी लागत में आई कमी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मंत्री के अनुसार, वर्ष 2014 में सौर बिजली की दर करीब 5.50 रुपये प्रति यूनिट थी, जो अब घटकर 2.15 रुपये प्रति यूनिट रह गई है। वहीं, सौर ऊर्जा और बैटरी से मिलने वाली बिजली की दर 2.70 रुपये प्रति यूनिट बताई गई है। इससे भविष्य में ऊर्जा भंडारण और बिजली आपूर्ति की व्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है।
भारत अब हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। प्रल्हाद जोशी ने बताया कि देश में हरित हाइड्रोजन की कीमत 279 रुपये और हरित अमोनिया की कीमत 49.75 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। भारतीय कंपनियों ने हरित हाइड्रोजन की खरीद और आपूर्ति के लिए कई समझौते किए हैं। इन समझौतों के तहत सालाना 5.5 लाख टन से अधिक हरित हाइड्रोजन की आपूर्ति की व्यवस्था की जाएगी।
मंत्री के मुताबिक, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत वर्ष 2023 में होने के बाद से अब तक करीब 5.5 लाख टन सालाना आपूर्ति के लिए लगभग 23 समझौते किए जा चुके हैं। इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक मात्रा निर्यात के लिए निर्धारित की गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से करीब 90 हजार करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद जताई गई है।
कुल मिलाकर, भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र निवेश, उत्पादन और विनिर्माण तीनों मोर्चों पर विस्तार कर रहा है। 67 अरब डॉलर का निवेश, 310 गीगावाट की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता और हरित हाइड्रोजन से जुड़े समझौते इस क्षेत्र में हो रहे बदलाव को दर्शाते हैं। अब चुनौती इस क्षमता को जमीन पर उतारने, ऊर्जा भंडारण बढ़ाने और देश की बढ़ती बिजली मांग को स्वच्छ ऊर्जा से पूरा करने की होगी।
![]()

