नई दिल्ली/वैश्विक बाजार
Middle East में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे वैश्विक तेल बाजार पर दिखने लगा है। Iran संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 8% का उछाल दर्ज किया गया है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
अमेरिकी क्रूड West Texas Intermediate (WTI) 72 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक Brent Crude लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया, जो सात महीनों के उच्च स्तर के करीब है।
तनाव की बड़ी वजह Strait of Hormuz को लेकर आशंका है। दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। यदि यहां आपूर्ति बाधित होती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि सैन्य अभियान तब तक जारी रह सकता है जब तक अमेरिका के रणनीतिक लक्ष्य पूरे नहीं होते। इससे बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।
तेल उत्पादक समूह OPEC और उसके सहयोगी देशों ने उत्पादन बढ़ाने का संकेत दिया है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो अतिरिक्त आपूर्ति भी कीमतों को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त नहीं होगी।
तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दिख सकता है।
वैश्विक शेयर बाजारों में भी दबाव देखा गया। एशिया और यूरोप के बाजारों में गिरावट रही, जबकि सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर मजबूत हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में Strait of Hormuz की स्थिति और प्रमुख तेल उत्पादक देशों की रणनीति तय करेगी कि यह उछाल अस्थायी है या वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़े संकट की शुरुआत।
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