📍 लखनऊ: पनकी-जवाहरपुर O&M निजीकरण पर बढ़ा विरोध
उत्तर प्रदेश में पनकी जवाहरपुर O&M निजीकरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पनकी (660 मेगावाट) और जवाहरपुर (2×660 मेगावाट) ताप विद्युत गृहों के परिचालन एवं अनुरक्षण (O&M) कार्य को निजी कंपनियों को सौंपने के प्रस्ताव के खिलाफ बिजली कर्मचारियों ने कड़ा रुख अपना लिया है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने इस प्रस्ताव को जनविरोधी और कर्मचारी-विरोधी बताते हुए साफ चेतावनी दी है कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
⚡ कोर कमेटी का बड़ा फैसला
26 अप्रैल 2026 को आयोजित बैठक में संघर्ष समिति की कोर कमेटी ने पनकी जवाहरपुर O&M निजीकरण के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया।
समिति के अनुसार, यह निर्णय न केवल कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है, बल्कि राज्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है।
💰 हजारों करोड़ की परियोजनाओं पर निजीकरण का खतरा
पनकी और जवाहरपुर दोनों ही सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित आधुनिक ताप विद्युत परियोजनाएं हैं।
- जवाहरपुर परियोजना: लगभग ₹14,000 करोड़
- पनकी ताप विद्युत गृह: लगभग ₹8,000 करोड़
समिति का कहना है कि पनकी जवाहरपुर O&M निजीकरण से सार्वजनिक संपत्ति पर निजी नियंत्रण बढ़ेगा, जो जनहित के खिलाफ है।
📈 बिजली दरों में बढ़ोतरी की आशंका
संघर्ष समिति ने दावा किया है कि पनकी जवाहरपुर O&M निजीकरण लागू होने पर बिजली उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
इसके परिणामस्वरूप:
- आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा
- बिजली बिल में वृद्धि संभव है
📢 संघर्ष समिति की प्रमुख मांगें
समिति ने सरकार और प्रबंधन के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं:
- O&M आउटसोर्सिंग प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए
- निजीकरण से संबंधित टेंडर रद्द किया जाए
- बिजली क्षेत्र को सरकारी नियंत्रण में रखा जाए
📅 13 मई को काली पट्टी बांधकर विरोध
संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि 13 मई 2026 को प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के कर्मचारी काली पट्टी बांधकर काम करेंगे और विरोध दर्ज कराएंगे।
यह कदम सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
🚨 बड़े आंदोलन की चेतावनी
यदि पनकी जवाहरपुर O&M निजीकरण वापस नहीं लिया गया, तो:
- कर्मचारी कार्यस्थल छोड़ देंगे
- व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा
- प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू होगा
समिति ने स्पष्ट किया है कि इस स्थिति की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रबंधन और सरकार की होगी।
📊 निष्कर्ष: ऊर्जा नीति पर बड़ा सवाल
पनकी और जवाहरपुर ताप विद्युत गृहों के O&M निजीकरण का मुद्दा अब सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं है।
यह मामला सीधे तौर पर:
- राज्य की ऊर्जा नीति
- सार्वजनिक क्षेत्र की मजबूती
- आम जनता के बिजली खर्च
से जुड़ गया है। आने वाले दिनों में यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।
🔎 FAQ
❓ पनकी और जवाहरपुर O&M निजीकरण क्या है?
यह प्रस्ताव इन बिजली घरों के संचालन और रखरखाव को निजी कंपनियों को सौंपने से जुड़ा है।
❓ कर्मचारी इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?
कर्मचारियों का मानना है कि इससे नौकरियों, सार्वजनिक क्षेत्र और उपभोक्ताओं पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
❓ विरोध कब होगा?
13 मई 2026 को काली पट्टी बांधकर विरोध किया जाएगा।
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