Sunday, April 19, 2026
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स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम विषयक पर संगोष्ठी

लाइव सत्यकाम न्यूज, लखनऊ : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद लखनऊ महानगर व एनएसएस आईटी कॉलेज सीतापुर रोड,लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन, मुख्य वक्ता में अभाविप के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो०राज शरण शाही, कार्यक्रम अध्यक्ष आईटी के निदेशक प्रो० विनीत विनीत कंसल,विशिष्ट अतिथि कुंवर ग्लोवल स्कूल के निदेशक पार्थ सिंह,स्वागत अध्यक्ष अनिल अग्रवाल,अभाविप लखनऊ महानगर उपाध्यक्ष विजय लोधी,महानगर मंत्री सरिता पांडे ने एक साथ ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती एवं युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।

युवाओं को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने कहा प्राचीन काल में मनोरंजन और शक्ति प्रदर्शन के लिए अस्त्र शस्त्र चलाने संबंधी आयोजन तथा पशुओं के साथ शक्ति प्रदर्शन किए जाते थे। पहलवानों की कुश्ती, तलवारबाजी जैसे अनेक कार्यक्रम होते थे। इसके अतिरिक्त युवकों वापस उनके बीच में भी शक्ति प्रदर्शन होता था। इस तरह के आयोजन में भोजन नृत्य और संगीत की व्यवस्था भी की जाती थी।

कोरोना काल में हमने फोन से सामूहिक रूप से बात करने को सीखा क्यूंकि उस समय में फैली भयानक बीमारी ने हम सबको झकझोर दिया था ।
अति सर्वत्र वर्जयेत” — किसी भी चीज की अति खराब होती है,यह कहावत सदियों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही सच है। चाहे भावनाएँ हों, संसाधन हों या आदतें, संतुलन बिगड़ते ही नुकसान शुरू हो जाता है। आज के युग में स्मार्टफोन सुविधा है, लेकिन इसकी अति ‘डिजिटल एडिक्शन’ बन चुकी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, स्क्रीन टाइम की अधिकता मानसिक तनाव और नींद की कमी का मुख्य कारण है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से डिजिटल आई स्ट्रेन या ‘कंप्यूटर विजन सिंड्रोम’ हो सकता है, जिसके लक्षणों में आंखों में सूखापन, मजलन, धुंधली दृष्टि और सिरदर्द अधिक होने की संभावना रहती हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रशिक्षण की पद्धति एवं नियमों को साझा करते हुए कहा हम कार्यकर्ताओं को 7 दिन और 25 दिन का प्रशिक्षण देते हैं और उस प्रशिक्षण में हम मोबाइल पार्किंग नाम एक ऐसी जगह सुनिश्चित करते जहां कार्यकर्ता अपने स्मार्टफोन को जमा कर देते हैं ताकि उनका प्रशिक्षण के समय उनका ध्यान ना भटके और एकाग्र होकर प्रशिक्षित हो सके। स्वामी विवेकानंद जी युवाओं को खेलने के प्रति प्रेरित करते थे ताकि उनकी चेतना का विकास हो सके और वह स्वस्थ मन और स्वस्थ शरीर से अपना ध्यान पढ़ाई में केंद्रित कर सकें।

मुख्य वक्ता विशेष आमंत्रित सदस्य व पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एबीवीपी प्रो०राज शरण शाही ने उपस्थित युवा तरुणाई को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात हम सब की भारत को विश्व गुरु बनाने की इच्छा थी कि आजादी के बाद से ही भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ के पद पर आसीन करने की आकांक्षा हर भारतीय के हृदय में रही है। प्राचीन काल में भारत अपनी शिक्षा प्रणाली (नालंदा, तक्षशिला), आध्यात्मिक दर्शन और वैज्ञानिक उपलब्धियों के कारण पूरे विश्व का मार्गदर्शन करता था।

1986 की दूसरी शिक्षा नीति में हमने टेक्नोलॉजी की कदम रखा टेक्नोलॉजी अपने आप में कोई मंजिल नहीं, बल्कि मंजिल तक पहुँचने का एक शक्तिशाली साधन है। 1986 की शिक्षा नीति ने भी इसी सोच के साथ कंप्यूटर और रेडियो को शिक्षा के उपकरण के रूप में अपनाया था। स्मार्टफोन आज के समय में दोधारी तलवार के जैसा साबित हो रहा है,यदि उपकरण का उपयोग बिना अनुशासन के किया जाए, तो वह लाभ के बजाय हानि पहुँचाता है।

भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाने की दिशा में भी तकनीक हमारा सबसे बड़ा ‘उपकरण’ है, बशर्ते हम इसके मालिक बनें, गुलाम नहीं। प्रो०शाही ने अज्ञानता पर संबोधित करते हुए कहा कि अज्ञानता क्या है सत्य से अनभिज्ञता: किसी विषय के वास्तविक स्वरूप को न जानना अज्ञानता है।

जैसे स्मार्टफोन एक ‘उपकरण’ है, लेकिन इसे जीवन का ‘आधार’ मान लेना समझ की कमी या अज्ञानता है।
अध्यात्म में ‘अविद्या’: भारतीय दर्शन (विशेषकर वेदांत) में अज्ञानता को ‘अविद्या’ कहा गया है। इसका अर्थ है स्वयं के वास्तविक स्वरूप को न पहचानना और भौतिक संसार के भ्रम को ही सत्य मान लेना।

सीखने की इच्छा का अभाव: प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात के अनुसार, असली अज्ञानता यह नहीं है कि आप कुछ नहीं जानते, बल्कि यह है कि आप ‘यह मानते हैं कि आप जानते हैं’ जबकि आप नहीं जानते।

विकास में बाधक: जैसा कि आपने ‘विश्व गुरु’ और शिक्षा नीतियों की बात की—अज्ञानता ही वह अंधकार है जो प्रगति को रोकता है। शिक्षा का मूल उद्देश्य सा विद्या या विमुक्तये (विद्या वही है जो मुक्त करे) अज्ञानता के बंधनों को काटना ही है।

कार्यक्रम की प्रस्तावना अभाविप लखनऊ महानगर उपाध्यक्ष विजय लोधी ने रखी तथा आभार ज्ञापन कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो०विनीत कंसल ने युवाओं के समक्ष अपने जीवन के अनुभव को साझा करते हुए किया।मंच संचालन महानगर मंत्री सरिता पांडे ने किया।
गौरा त्रिपाठी ने वन्देमातरम व देश भक्ति गीत गाकर उपस्थित युवा ताैरुनाई को मंत्रमुग्ध किया ।
स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम विषयक इस संगोष्ठी में एबीवीपी अवध प्रांत मंत्री अर्पण कुशवाहा ,प्रांत संगठन मंत्री अंशुल विद्यार्थी,महानगर विभाग संगठन मंत्री पुष्पेंद्र बाजपेई सहित तमाम छात्र शक्ति उपस्थित रही।

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