लखनऊ/नोएडा। उत्तर प्रदेश में बिजली दरों के निर्धारण को लेकर आज 9 मार्च को महत्वपूर्ण जनसुनवाई आयोजित की जा रही है। यह जनसुनवाई ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सभागार में सुबह 11 बजे से शुरू होगी, जहां उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के समक्ष बिजली कंपनियों के प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी।
इस सुनवाई में नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (NPCL) और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) द्वारा प्रस्तुत वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) और बिजली दरों से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। साथ ही उपभोक्ताओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी आयोग के सामने पक्ष रखा जाएगा।
उपभोक्ता परिषद रखेगा उपभोक्ताओं की बात
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जनसुनवाई के लिए अपनी तैयारी पूरी कर ली है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा आयोग के सामने उपभोक्ताओं का पक्ष मजबूती से रखेंगे।
परिषद का कहना है कि बिजली कंपनियां पिछले कई वर्षों से बिजली दरों में बढ़ोतरी की मांग करती रही हैं, लेकिन उपभोक्ताओं के हितों को देखते हुए इस प्रयास का लगातार विरोध किया जाता रहा है।
51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस का दावा
उपभोक्ता परिषद के अनुसार प्रदेश की बिजली कंपनियों के पास उपभोक्ताओं का लगभग 51 हजार करोड़ रुपये का सरप्लस मौजूद है। परिषद का तर्क है कि जब कंपनियों के पास इतनी बड़ी राशि अतिरिक्त है, तब बिजली दरों में बढ़ोतरी का कोई औचित्य नहीं बनता।
परिषद का मानना है कि मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए आने वाले कई वर्षों तक बिजली दरों में वृद्धि की आवश्यकता नहीं है।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर भी उठेंगे सवाल
जनसुनवाई के दौरान स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए जाएंगे। परिषद का आरोप है कि कई स्थानों पर उपभोक्ताओं की सहमति के बिना ही पारंपरिक कनेक्शन को प्रीपेड मोड में बदला जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।
इसके अलावा सुनवाई में इन विषयों को भी उठाया जाएगा—
- बिलिंग प्रणाली से जुड़ी शिकायतें
- डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन की समस्या
- मल्टी प्वाइंट और सिंगल प्वाइंट कनेक्शन का विवाद
- बिल्डरों द्वारा बिजली कनेक्शन में मनमानी
आयोग से दर बढ़ोतरी खारिज करने की मांग
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जब बिजली कंपनियों के पास हजारों करोड़ रुपये का सरप्लस उपलब्ध है, तब बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विद्युत नियामक आयोग उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देते हुए किसी भी प्रकार की दर वृद्धि को मंजूरी नहीं देगा।
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