उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के मंत्रिमंडल का विस्तार 10 मई को होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक योगी सरकार में 6 नए चेहरों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। इस संभावित कैबिनेट विस्तार को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा की बड़ी राजनीतिक रणनीति माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज राज्यपाल Anandiben Patel से मुलाकात कर सकते हैं। इसके बाद राजभवन में नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होने की संभावना है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में कुल 54 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक नियमों के अनुसार मंत्रियों की संख्या 60 तक हो सकती है। ऐसे में खाली पड़े 6 पदों को भरने की तैयारी तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक समाजवादी पार्टी के बागी विधायक पूजा पाल और मनोज पांडे को योगी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा कृष्णा पासवान, भूपेंद्र चौधरी, अशोक कटारिया और रोमी साहनी के नाम भी मंत्री पद की दौड़ में बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि भाजपा जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए यह बड़ा कदम उठाने जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा संगठन और सरकार दोनों स्तर पर बड़ा संदेश देना चाहती है। खासतौर पर पिछड़ा, दलित और ब्राह्मण वोट बैंक को साधने के लिए यह कैबिनेट विस्तार अहम माना जा रहा है। सपा और विपक्षी दलों के नेताओं को अपने साथ जोड़कर भाजपा राजनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश में है।
इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पश्चिम बंगाल में आयोजित भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुए। कोलकाता में प्रधानमंत्री Narendra Modi की मौजूदगी में भाजपा नेता Suvendu Adhikari ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस मौके पर योगी आदित्यनाथ ने शुभेंदु अधिकारी को भगवा अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया और उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।
समारोह में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक किर्तनिया, क्षुदीराम टुडू और निशीथ प्रमाणिक शामिल रहे। पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान शुभेंदु अधिकारी और योगी आदित्यनाथ की नजदीकियां काफी चर्चा में रही थीं।
अब उत्तर प्रदेश में होने वाला संभावित कैबिनेट विस्तार राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा किन चेहरों पर भरोसा जताती है और आगामी चुनावों के लिए क्या संदेश देने की कोशिश करती है।
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