लखनऊ।
प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लागू होने के बाद बिजली आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्पष्ट कहा है कि जब तक उपभोक्ताओं को 24 घंटे निर्बाध बिजली नहीं मिलती, तब तक प्रीपेड मीटर प्रणाली का पूर्ण क्रियान्वयन व्यावहारिक नहीं माना जा सकता।
परिषद ने यह भी सवाल उठाया कि हाल ही में प्रदेश के कई इलाकों में ऐसे उपभोक्ताओं की भी बिजली काट दी गई, जिनका बैलेंस पॉजिटिव था। यह स्थिति तकनीकी गड़बड़ी या प्रबंधन की कमी की ओर संकेत करती है।
पॉजिटिव बैलेंस के बावजूद बिजली कटना बड़ा सवाल
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि उनके प्रीपेड खाते में बैलेंस होने के बावजूद उनकी बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। उन्होंने पूछा कि ऐसे मामलों की जांच कौन करेगा और जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
बकाया जमा करने के बाद भी कनेक्शन बहाल कैसे होगा?
परिषद ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड से यह स्पष्ट करने को कहा है कि यदि किसी उपभोक्ता का कनेक्शन बकाया के कारण काटा गया और उसने भुगतान कर दिया, तो रोस्टर व्यवस्था के बीच उसका कनेक्शन तुरंत कैसे जोड़ा जाएगा।
कानून में 24 घंटे बिजली का स्पष्ट प्रावधान
भारत सरकार द्वारा लागू Electricity Consumer Rights Rules 2020 के तहत सभी उपभोक्ताओं को 24 घंटे गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना अनिवार्य है। नियमों की धारा 10 में इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
परिषद का कहना है कि उत्तर प्रदेश में इस नियम की मूल भावना का पालन नहीं हो रहा है।
प्रदेश में लाखों उपभोक्ताओं पर नेगेटिव बैलेंस
परिषद के अनुसार 13 फरवरी तक प्रदेश में 63 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 51 लाख उपभोक्ताओं पर करीब 1447 करोड़ रुपये का नेगेटिव बैलेंस दर्ज है।
हालांकि परिषद ने माना कि जिन उपभोक्ताओं पर बकाया है, उन्हें भुगतान करना चाहिए, लेकिन त्योहार से पहले बड़ी संख्या में कनेक्शन काटना उचित नहीं है।
रोस्टर व्यवस्था और प्रीपेड सिस्टम में टकराव
प्रदेश में अभी भी रोस्टर के आधार पर बिजली आपूर्ति की जा रही है। ऐसे में यदि उपभोक्ता रिचार्ज करता है, लेकिन उसके क्षेत्र में बिजली ही उपलब्ध नहीं है, तो प्रीपेड प्रणाली का लाभ कैसे मिलेगा—यह एक बड़ा सवाल बन गया है।
बिलिंग में पारदर्शिता की कमी
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने अपने टैरिफ आदेश में निर्देश दिया है कि प्रीपेड उपभोक्ताओं को भी पोस्टपेड की तरह पूरा बिल विवरण उपलब्ध कराया जाए। इसके बावजूद कई उपभोक्ताओं को विस्तृत बिल नहीं मिल रहा है।
उपभोक्ता परिषद की प्रमुख मांगें
- पूरे प्रदेश में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए
- रोस्टर व्यवस्था समाप्त की जाए
- प्रीपेड मीटर प्रणाली को पारदर्शी बनाया जाए
- उपभोक्ताओं के अधिकारों का पूर्ण संरक्षण किया जाए
निष्कर्ष
उपभोक्ता परिषद का कहना है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रणाली तभी सफल होगी, जब उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली और उनके अधिकारों का पूरा लाभ मिलेगा। एकतरफा कार्रवाई से उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ सकता है।
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