लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता और सड़क के बार-बार धंसने का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच तक पहुंच गया है। एक्सप्रेसवे के निर्माण में कथित खामियों और सड़क धंसने की घटनाओं को लेकर जनहित याचिका दाखिल की गई है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय यानी MoRTH को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस घटनाक्रम के बाद एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क के धंसने और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। इसी को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई। याचिका में एक्सप्रेसवे के निर्माण में कथित तौर पर बरती गई लापरवाही और सड़क की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के सामने यह मुद्दा रखा गया कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहे महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे की सड़क अगर निर्माण के दौरान ही धंसने लगे तो इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच जरूरी है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके पूरा होने के बाद लखनऊ और कानपुर के बीच आवागमन को और आसान बनाने का लक्ष्य है। ऐसे में सड़क की गुणवत्ता और सुरक्षा सीधे तौर पर यात्रियों से जुड़ा विषय है। एक्सप्रेसवे पर किसी भी तरह की तकनीकी खामी या सड़क धंसने की घटना वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसी वजह से इस मामले को लेकर दाखिल जनहित याचिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मामले में केंद्र और राज्य सरकार के साथ संबंधित विभागों से जवाब मांगा है। अदालत के नोटिस के बाद अब संबंधित अधिकारियों को एक्सप्रेसवे के निर्माण, सड़क की गुणवत्ता और सामने आई खामियों को लेकर अपना पक्ष रखना होगा। अदालत के सामने यह भी स्पष्ट हो सकता है कि सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की गई और सड़क धंसने की घटनाओं के बाद क्या कदम उठाए गए।
इस मामले में NHAI और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक्सप्रेसवे की परियोजना और उससे जुड़ी तकनीकी व्यवस्थाओं में संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी होती है। अदालत की ओर से जवाब मांगे जाने के बाद अब संबंधित विभागों से परियोजना से जुड़े दस्तावेज और स्थिति की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
वहीं, एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर उठे सवालों के बीच यह भी महत्वपूर्ण है कि सड़क की गुणवत्ता की जांच वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से की जाए। सड़क के नीचे की मिट्टी, जल निकासी, निर्माण सामग्री, सड़क की परतों और निर्माण प्रक्रिया जैसे कई पहलुओं की जांच से ही यह पता चल सकता है कि सड़क धंसने की वजह क्या रही। केवल सड़क की ऊपरी सतह देखकर निर्माण की गुणवत्ता का आकलन करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
फिलहाल हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बाद इस परियोजना को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों पर भी नजरें टिक गई हैं। अदालत में सरकार और संबंधित एजेंसियों के जवाब के बाद मामले की अगली दिशा स्पष्ट होगी। अगर जांच में निर्माण संबंधी गंभीर खामियां सामने आती हैं तो जिम्मेदारी तय करने और सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत पड़ सकती है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परिवहन परियोजना माना जा रहा है। इसलिए यात्रियों की सुरक्षा और सड़क की मजबूती को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय हो सकती है। अब सभी की नजर हाईकोर्ट में संबंधित पक्षों की ओर से दिए जाने वाले जवाब और आगे होने वाली सुनवाई पर है।
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