ब्रिक्स (BRICS) देशों के बीच व्यापार में पिछले दो दशकों में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बावजूद वैश्विक व्यापार में इसकी हिस्सेदारी अभी भी करीब पांच प्रतिशत ही है। भारत सरकार ने इसे आर्थिक सहयोग और व्यापारिक एकीकरण बढ़ाने का बड़ा अवसर बताया है।
भारत के वाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal ने गुजरात के गांधीनगर में आयोजित ब्रिक्स देशों की व्यापार एवं आर्थिक मामलों से जुड़ी दूसरी बैठक में कहा कि सदस्य देशों के बीच व्यापार 2003 के 84 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 1.17 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है। यानी बीते वर्षों में इसमें लगभग 13 गुना वृद्धि हुई है।
हालांकि, इतनी बड़ी वृद्धि के बावजूद यह वैश्विक व्यापार का केवल करीब पांच प्रतिशत हिस्सा है। राजेश अग्रवाल ने कहा कि इससे साफ है कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक एकीकरण, मजबूत मूल्य श्रृंखला (Value Chain) और आर्थिक सहयोग को और आगे बढ़ाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
ब्रिक्स समूह में फिलहाल India, Brazil, Russia, China, South Africa के अलावा Egypt, Ethiopia, Iran, Saudi Arabia, United Arab Emirates और Indonesia शामिल हैं।
यह समूह वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। भारत ने 2012, 2016 और 2021 के बाद चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली है, जिसे भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है।
बैठक में संतुलित व्यापार को बढ़ावा देने, सेवा क्षेत्र में नए अवसर पैदा करने और सदस्य देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की गई। भारत ने इस दौरान मजबूत सप्लाई चेन, डिजिटल व्यापार और निवेश सहयोग पर भी जोर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ब्रिक्स देश आपसी व्यापार बाधाओं को कम करते हैं और स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ाते हैं, तो आने वाले वर्षों में यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था में और मजबूत भूमिका निभा सकता है।
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