NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने कथित मास्टरमाइंड Shubham Khairnar की सीबीआई हिरासत पांच दिन और बढ़ा दी है। वहीं मामले में गिरफ्तार पांच अन्य आरोपियों को 2 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस फैसले के बाद अब माना जा रहा है कि जांच एजेंसी को इस कथित पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े कई बड़े सुराग मिल सकते हैं।
सीबीआई ने हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद छह आरोपियों को अदालत में पेश किया था। एजेंसी ने अदालत से मंगिलाल बिवाल, विकास बिवाल, दिनेश बिवाल, यश यादव और धनंजय लोखंडे को न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की, जिसे विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने स्वीकार कर लिया। दूसरी ओर, सीबीआई ने शुभम खैरनार की हिरासत बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि मामले में कई अन्य संदिग्धों की पहचान अभी बाकी है और लीक हुए प्रश्नपत्र खरीदने वाले लोगों तक पहुंचना जरूरी है।
जांच एजेंसी के मुताबिक यह केवल एक साधारण पेपर लीक नहीं बल्कि एक बड़ी संगठित साजिश हो सकती है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि मामले में हुए करोड़ों रुपये के संभावित वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क को किसने तैयार किया, इसमें कौन-कौन शामिल थे और पेपर किस तरह से लीक किया गया।
सूत्रों के अनुसार 30 वर्षीय शुभम खैरनार महाराष्ट्र के नासिक का रहने वाला है और वह बीएएमएस का छात्र है। सीबीआई ने उसे पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया है कि उसने कथित तौर पर पुणे के एक संदिग्ध से “अनुमानित प्रश्नपत्र” करीब 10 लाख रुपये में खरीदा था और बाद में उसे हरियाणा के एक खरीदार को 15 लाख रुपये में बेच दिया।
सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि खैरनार को महाराष्ट्र ले जाकर गवाहों, सह-आरोपियों और बरामद सबूतों के सामने पेश करना जरूरी है, ताकि मामले की कड़ियां जोड़ी जा सकें। हालांकि आरोपी के वकील ने सीबीआई की मांग का विरोध करते हुए कहा कि एजेंसी पहले ही इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर चुकी है और आरोपी जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।
इस बीच, जांच एजेंसी ने मामले में गिरफ्तार दो अन्य आरोपियों — मनीषा मंधारे और शिवराज मोटेगांवकर — के हस्ताक्षर नमूने लेने की अनुमति भी अदालत से मांगी है। माना जा रहा है कि इन नमूनों के जरिए दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।
NEET-UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है और हर साल लाखों छात्र इसमें शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसे मामलों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। इस केस ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सबकी नजर सीबीआई जांच पर टिकी है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। अगर जांच में और खुलासे होते हैं, तो यह देश की सबसे बड़ी परीक्षा घोटालों में से एक साबित हो सकता है।
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