Delhi Police ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन साइबर क्लीन’ के तहत देशभर में सक्रिय कई अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोहों का भंडाफोड़ किया है। इस अभियान के दौरान करीब 40 करोड़ रुपये के ऑनलाइन फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने 89 आरोपियों को कानून के दायरे में लाते हुए 35 लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि 54 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
अधिकारियों के मुताबिक यह विशेष अभियान अप्रैल महीने में पश्चिमी दिल्ली में एक महीने तक चलाया गया। इस दौरान दिल्ली, झारखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात समेत कई राज्यों में छापेमारी की गई। पुलिस ने कुल 34 साइबर फ्रॉड मामलों को सुलझाने का दावा किया है।
जांच में सामने आया कि आरोपी कई तरह के साइबर अपराधों में शामिल थे। इनमें “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर लोगों को डराकर पैसे ठगना, निवेश के नाम पर धोखाधड़ी, एपीके फाइल भेजकर मोबाइल फोन हैक करना, फर्जी डेटिंग सदस्यता और “म्यूल अकाउंट” उपलब्ध कराना शामिल है।
पुलिस ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान 14.18 लाख रुपये नकद, 359 सिम कार्ड, 218 एटीएम कार्ड, 88 मोबाइल फोन, 78 चेकबुक, पांच पासबुक, तीन क्रेडिट कार्ड, दो लैपटॉप, एक पेन ड्राइव और साइबर ठगी में इस्तेमाल की गई एक कार बरामद की गई है।
दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने बैंकों के साथ समन्वय बनाकर करीब 1.11 करोड़ रुपये ठगों तक पहुंचने से भी रोके। इसके अलावा अदालत के आदेश के जरिए पीड़ितों को लगभग 51.95 लाख रुपये वापस दिलाए गए।
इस अभियान का सबसे बड़ा खुलासा पश्चिमी दिल्ली के करमपुरा इलाके में हुआ, जहां एक संगठित “म्यूल अकाउंट” और ओटीपी शेयरिंग गिरोह का पर्दाफाश किया गया। पुलिस के मुताबिक आरोपी “DL Office” नाम के एक सोशल मीडिया ग्रुप के जरिए देशभर में साइबर ठगी के लिए बैंक खाते और ओटीपी उपलब्ध कराते थे।
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिट्टू चौधरी, लविश चुघ, ऋषि, अरुण सिंह, आशीष और दीपक भट्ट के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि छापेमारी के दौरान आरोपी इमारत की चौथी मंजिल से कूदकर भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस टीम ने पीछा कर उन्हें पकड़ लिया।
तकनीकी जांच और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के डेटा के आधार पर पता चला कि यह गिरोह करीब 40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ी 35 शिकायतों में शामिल था।
एक अन्य मामले में पुलिस ने “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर एक वरिष्ठ नागरिक से ठगी करने वाले गिरोह का भी पर्दाफाश किया। आरोपियों ने खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी बताकर फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी थी।
इस मामले में पंजाब और झारखंड से चार आरोपियों — अशोक कुमार, सूरज कुमार, दीपू कुमार और विवेक कुमार — को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार ये आरोपी “म्यूल अकाउंट” संचालित करने और ठगी के पैसे को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने का काम करते थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराध के बदलते तरीकों को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी अनजान लिंक, APK फाइल या फर्जी कॉल पर भरोसा करने से बचना चाहिए। दिल्ली पुलिस ने भी लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की तुरंत शिकायत करें।
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