Wednesday, May 20, 2026
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Southampton पर जासूसी के आरोप साबित, EFL का बड़ा एक्शन; अब Players करेंगे केस!

इंग्लैंड के फुटबॉल जगत में बड़ा विवाद सामने आया है। Southampton F.C. पर दूसरी टीमों की ट्रेनिंग सत्र की कथित जासूसी कराने के आरोप साबित होने के बाद इंग्लैंड फुटबॉल लीग (EFL) ने बड़ा फैसला लेते हुए क्लब को चैंपियनशिप प्लेऑफ फाइनल से बाहर कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद क्लब को अगले सीजन में चार अंकों की कटौती की सजा भी सुनाई गई है।

इस फैसले ने फुटबॉल जगत में हलचल मचा दी है। सबसे बड़ी बात यह है कि अब क्लब के अपने खिलाड़ी भी प्रबंधन से नाराज बताए जा रहे हैं और आर्थिक नुकसान को लेकर कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खिलाड़ियों का मानना है कि अगर टीम प्रीमियर लीग में पहुंच जाती तो उन्हें बोनस, वेतन वृद्धि और प्रमोशन से जुड़ी बड़ी आर्थिक सुविधाएं मिलतीं। लेकिन क्लब पर हुई कार्रवाई के कारण अब यह अवसर खत्म हो गया है।

जानकारी के अनुसार, कई खिलाड़ी Professional Footballers’ Association से कानूनी सलाह लेने पर विचार कर रहे हैं। खिलाड़ियों का आरोप है कि क्लब प्रबंधन की गलती का नुकसान उन्हें भुगतना पड़ रहा है।

EFL की स्वतंत्र अनुशासन समिति ने जांच में पाया कि साउथैम्पटन ने बिना अनुमति Middlesbrough F.C., Oxford United F.C. और Ipswich Town F.C. की ट्रेनिंग सत्र की रिकॉर्डिंग करवाई थी। इसे खेल भावना और निष्पक्षता के खिलाफ गंभीर उल्लंघन माना गया।

इस फैसले के बाद अब मिडिल्सब्रा को दोबारा प्लेऑफ फाइनल में जगह दे दी गई है। माना जा रहा है कि शनिवार को वेम्बली स्टेडियम में होने वाले फाइनल में मिडिल्सब्रा का मुकाबला Hull City A.F.C. से होगा। हालांकि साउथैम्पटन क्लब ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की है और सजा को जरूरत से ज्यादा कठोर बताया है।

इस पूरे विवाद में क्लब के युवा विश्लेषक विलियम साल्ट का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। आरोप है कि वह पेड़ों और झाड़ियों के पीछे छिपकर मिडिल्सब्रा की ट्रेनिंग रिकॉर्ड कर रहे थे, जहां उन्हें पकड़ लिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टोंडा एकर्ट समेत क्लब के कुछ अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए The Football Association भी अलग से कार्रवाई कर सकता है। अधिकारियों पर खेल की छवि खराब करने और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए जा सकते हैं।

इस विवाद की तुलना वर्ष 2024 में कनाडा महिला फुटबॉल टीम के जासूसी मामले से भी की जा रही है, जब पूर्व कोच Bev Priestman और उनके सहयोगियों पर ड्रोन के जरिए जासूसी कराने के आरोप में एक साल का प्रतिबंध लगाया गया था।

उधर साउथैम्पटन क्लब के अंदर भी हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों और प्रबंधन के बीच तनाव बढ़ गया है। कई खिलाड़ी क्लब अधिकारियों से जवाब मांग रहे हैं। दूसरी ओर मिडिल्सब्रा ने EFL के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि खेल की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी था।

दिलचस्प बात यह है कि जिन मुकाबलों से पहले जासूसी की गई थी, उनमें साउथैम्पटन को ज्यादा फायदा नहीं मिला। टीम ऑक्सफोर्ड से हार गई थी, जबकि इप्सविच और मिडिल्सब्रा के खिलाफ मुकाबले ड्रॉ रहे थे। इसके बावजूद लीग ने नियमों के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए सख्त कार्रवाई की है।

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