NEET UG परीक्षा पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच नाराजगी के माहौल के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के दर्द को समझती है और परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
जागरण भारत शिक्षा सम्मेलन 2026 में बोलते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि NEET UG परीक्षा में हुई अनियमितताओं के कारण करीब 22 लाख छात्रों को मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
शिक्षा मंत्री ने कहा, “22 लाख बच्चों को भारी मानसिक पीड़ा हुई है। उनकी पीड़ा को समझते हुए और जिम्मेदारी लेते हुए हमें कुछ कठोर फैसले लेने पड़े।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार नहीं चाहती कि परीक्षा माफिया और अनियमितताओं की वजह से किसी भी योग्य छात्र को उसकी हक की सीट से वंचित होना पड़े।
दरअसल, मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित NEET UG परीक्षा 3 मई को हुई थी। परीक्षा के बाद कई राज्यों से पेपर लीक और गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई थीं। मामले ने तूल पकड़ा तो राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच सीबीआई कर रही है।
सरकार ने 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित करने का फैसला किया है। इस पर धर्मेंद्र प्रधान ने भरोसा दिलाया कि पुनर्परीक्षा को 100 प्रतिशत त्रुटिरहित बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा कराना है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जब अधिकारियों को कुछ मूल्यांकनों और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की जानकारी मिली, तब परीक्षा रद्द करने जैसा बड़ा फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार समस्या से मुंह मोड़ने के बजाय उसका समाधान करने में विश्वास रखती है।
उन्होंने यह भी माना कि सरकार को इस मुद्दे पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन व्यवस्था में सुधार करना सरकार की जिम्मेदारी है। शिक्षा मंत्री ने कहा, “आलोचना और चुनौतियां लोकतंत्र का हिस्सा हैं। लेकिन आंखें बंद करके समस्या को नजरअंदाज करना हमारा कर्तव्य नहीं है।”
देशभर में NEET UG विवाद को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन भी किए हैं। कई छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों ने भी सरकार और NTA पर निशाना साधते हुए परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सरकार के लिए निष्पक्ष परीक्षा आयोजित करना बड़ी चुनौती होगी।
फिलहाल छात्रों की नजर 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा पर टिकी है। सरकार का दावा है कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।
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