फीफा विश्व कप 2026 में दक्षिण कोरिया की नॉकआउट दौर में पहुंचने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। ग्रुप-ए के अहम मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने दक्षिण कोरिया को 1-0 से हराकर इतिहास रच दिया। इस हार के बाद सबसे ज्यादा चर्चा दक्षिण कोरिया के मुख्य कोच होंग म्युंग-बो के उस फैसले की हो रही है, जिसमें उन्होंने टीम के कप्तान और स्टार खिलाड़ी सोन ह्युंग-मिन को शुरुआती एकादश से बाहर रखा।
मैच से पहले अधिकांश फुटबॉल विशेषज्ञों और प्रशंसकों को उम्मीद थी कि सोन ह्युंग-मिन टीम की शुरुआत से अगुआई करेंगे। लेकिन जब शुरुआती टीम की घोषणा हुई तो उनका नाम बेंच पर देखकर सभी हैरान रह गए। यह उनके विश्व कप करियर में पहली बार था जब वह किसी मुकाबले में शुरुआती एकादश का हिस्सा नहीं बने।
मैच के बाद कोच होंग म्युंग-बो ने अपने फैसले की वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि उनकी योजना थी कि दूसरे हाफ में जब दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ी थक जाएंगे, तब सोन ह्युंग-मिन को मैदान पर उतारकर उनकी गति और अनुभव का फायदा उठाया जाए। लेकिन यह रणनीति पूरी तरह सफल नहीं हो सकी और दक्षिण कोरिया पूरे मैच में अपनी लय हासिल नहीं कर पाया।
दूसरी ओर, दक्षिण अफ्रीका ने अनुशासित और प्रभावशाली खेल का प्रदर्शन किया। टीम ने मिले अवसर का पूरा फायदा उठाते हुए 1-0 की ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इस जीत के साथ दक्षिण अफ्रीका ने पहली बार फीफा विश्व कप के नॉकआउट चरण में जगह बनाई और अपने फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा कारनामा कर दिखाया।
सोन ह्युंग-मिन दूसरे हाफ में मैदान पर उतरे, लेकिन तब तक मुकाबले का रुख काफी हद तक बदल चुका था। दक्षिण कोरिया ने बराबरी के लिए लगातार प्रयास किए, लेकिन टीम गोल करने में सफल नहीं हो सकी। हार के बाद अब दक्षिण कोरिया की आगे बढ़ने की उम्मीदें अन्य ग्रुपों के परिणामों और सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों की दौड़ पर निर्भर हो गई हैं।
मैच के बाद दक्षिण कोरिया के मीडिया और फुटबॉल विशेषज्ञों ने कोच के फैसले की कड़ी आलोचना की। कई विश्लेषकों का मानना है कि इतने महत्वपूर्ण मुकाबले में टीम के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली खिलाड़ी को शुरुआती मिनटों से बाहर रखना बड़ा जोखिम था, जो अंततः टीम पर भारी पड़ गया।
हार के बाद होंग म्युंग-बो ने भी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की। उन्होंने कहा कि परिणाम को देखते हुए उनका फैसला सही साबित नहीं हुआ और मुख्य कोच होने के नाते पूरी जिम्मेदारी उनकी है। उन्होंने यह भी माना कि यदि पहले से परिणाम का अंदाजा होता, तो शायद टीम संयोजन अलग होता।
गौरतलब है कि होंग म्युंग-बो दक्षिण कोरिया के पूर्व कप्तान भी रह चुके हैं और 2002 विश्व कप में टीम को ऐतिहासिक सेमीफाइनल तक पहुंचाने वाली टीम का हिस्सा थे। हालांकि कोच के रूप में उनका रिकॉर्ड मिश्रित रहा है। 2014 विश्व कप में भी उनके नेतृत्व में दक्षिण कोरिया एक भी मुकाबला नहीं जीत पाया था।
अब दक्षिण कोरिया की नजर अन्य मुकाबलों के नतीजों पर टिकी हुई है, जबकि दक्षिण अफ्रीका पूरे आत्मविश्वास के साथ नॉकआउट चरण में प्रवेश कर चुका है। इस मुकाबले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में एक रणनीतिक फैसला पूरी टीम के अभियान की दिशा बदल सकता है।
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