Saturday, May 23, 2026
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पंजाब में BJP का बड़ा दांव! सुनील जाखड़ के बाद सिख अध्यक्ष पर मंथन तेज

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक खेल शुरू होता दिखाई दे रहा है। भारतीय जनता पार्टी अब पंजाब में अपनी रणनीति बदलने की तैयारी में जुट गई है। खबर है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के पद पर इस बार किसी बड़े सिख चेहरे को आगे कर सकती है। माना जा रहा है कि पार्टी पंजाब में अपनी छवि बदलने और सिख वोट बैंक में पकड़ मजबूत करने के लिए यह बड़ा कदम उठाने जा रही है।

दरअसल, पंजाब भाजपा के मौजूदा अध्यक्ष सुनील जाखड़ का कार्यकाल जुलाई 2026 में खत्म होने वाला है। ऐसे में पार्टी नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश में जुट गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा इस बार किसी प्रभावशाली सिख नेता को कमान सौंप सकती है।

सबसे ज्यादा चर्चा केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के नाम की हो रही है। रवनीत बिट्टू पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं और हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। इसके अलावा पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल का नाम भी चर्चा में है। मनप्रीत, शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के चचेरे भाई हैं और पंजाब राजनीति में बड़ा प्रभाव रखते हैं।

इन दोनों नेताओं के अलावा कई अन्य नाम भी सामने आ रहे हैं। इनमें पूर्व आईएएस अधिकारी जगमोहन सिंह राजू, भाजपा नेता मनजीत सिंह राय, राज्यसभा सांसद सतनाम संधू, पूर्व मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी, केवल ढिल्लों और फतेह जंग सिंह बाजवा जैसे नेता शामिल हैं।

सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेतृत्व मानता है कि पंजाब की राजनीति में सिख चेहरा बेहद महत्वपूर्ण होता है। राज्य में लंबे समय से सिख समुदाय का राजनीतिक प्रभाव बना हुआ है और अब तक पंजाब में ज्यादातर मुख्यमंत्री सिख समुदाय से ही रहे हैं। ऐसे में भाजपा भी अब उसी सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश कर रही है।

बताया जा रहा है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी पंजाब भाजपा की रणनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे लगातार पंजाब के दौरे कर रहे हैं और संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। पार्टी का मानना है कि अगर 2027 में मजबूत चुनौती पेश करनी है तो पंजाब में स्थानीय और सिख नेतृत्व को आगे लाना जरूरी होगा।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा लंबे समय तक पंजाब में “बाहरी पार्टी” की छवि से जूझती रही है। अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद पार्टी को सिख वोटरों के बीच नई पहचान बनाने में काफी मेहनत करनी पड़ी है। ऐसे में सिख प्रदेश अध्यक्ष का चयन भाजपा की नई रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

हालांकि हिंदू नेताओं की दावेदारी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। वरिष्ठ भाजपा नेता तरुण चुघ का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल बताया जा रहा है। लेकिन फिलहाल पार्टी के अंदर सिख चेहरे को प्राथमिकता दिए जाने की चर्चा सबसे ज्यादा है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा पंजाब में नया चेहरा लाकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर पाती है या नहीं। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि 2027 का पंजाब चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प और रणनीतिक होने वाला है।

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