पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर भारत की राजनीति भी गरमा गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया संकट पर संसद में चर्चा से बच रही है क्योंकि इससे प्रधानमंत्री की साख पर असर पड़ सकता है।
रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि यदि संसद में इस मुद्दे पर खुली चर्चा हुई तो यह सामने आ जाएगा कि भारत सरकार अमेरिका और इज़राइल के दबाव में झुक गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा से बचना चाहती है।
राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को भारत की अर्थव्यवस्था से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर तेल की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि और आर्थिक असर जैसे मुद्दों पर संसद में चर्चा होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अगर इस मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा होती है तो प्रधानमंत्री मोदी संसद का सामना नहीं कर पाएंगे। राहुल गांधी के मुताबिक चर्चा होने पर कई ऐसी बातें सामने आ सकती हैं जिससे सरकार की नीति और फैसलों पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
पश्चिम एशिया के मुद्दे को लेकर संसद में सोमवार को जोरदार हंगामा भी देखने को मिला। विपक्षी दलों ने इस विषय पर चर्चा की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इसके चलते लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
जानकारी के मुताबिक, बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत ही तीखी राजनीतिक टकराव के साथ हुई। भाजपा सांसदों ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।
इससे पहले इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने संसद परिसर के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत पर भी पड़ सकता है, इसलिए इस पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में संसद में इस मुद्दे पर चर्चा होती है या नहीं, और सरकार तथा विपक्ष के बीच यह टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है।
![]()

