रूस ने अमेरिका को दिया जवाब, कहा – भारत को किसी की अनुमति की जरूरत नहीं
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच रूस और अमेरिका के बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अमेरिका ने दावा किया कि उसने भारत को रूसी तेल स्वीकार करने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है, जिस पर रूस ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि भारत एक स्वतंत्र देश है और उसे किसी से इजाजत लेने की जरूरत नहीं है।
अमेरिका ने क्या कहा
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसी स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने भारत को उन रूसी तेल खेपों को अस्थायी रूप से स्वीकार करने की अनुमति दी है जो पहले से समुद्र में लदी हुई थीं।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि भारत ने पहले प्रतिबंधित रूसी तेल की खरीद को सीमित कर दिया था। उन्होंने कहा कि यह कदम अस्थायी है और इसका उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति में आई कमी को पूरा करना है।
रूस ने दिया दो टूक जवाब
अमेरिका के इस बयान पर भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने साफ शब्दों में कहा कि भारत को किसी भी देश से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार फैसले लेने में सक्षम है।
रूसी राजदूत ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के रुख की भी सराहना की और कहा कि दुनिया में कोई भी देश रूस के तेल को पूरी तरह बाजार से बाहर नहीं कर सकता, खासकर भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश से।
मिडिल ईस्ट युद्ध का असर
ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो गई है। हॉर्मुज जलसंधि में तनाव के कारण सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे देशों से तेल की सप्लाई बाधित हो रही है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है। ऐसे में भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है, क्योंकि रूस भारत को अपेक्षाकृत सस्ते दाम पर तेल उपलब्ध करा रहा है।
भारत की ऊर्जा रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न देशों से तेल आयात करता है। रूस से मिलने वाला सस्ता कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक साबित हो रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
![]()

