देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक में शीर्ष नेतृत्व को लेकर तस्वीर अब काफी हद तक साफ होती नजर आ रही है। बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एवं प्रबंध निदेशक शशिधर जगदीशन के तीसरे कार्यकाल का रास्ता मजबूत हो गया है। पूर्व अध्यक्ष अतनु चक्रवर्ती द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच में कोई ठोस आधार नहीं मिलने के बाद बैंक का निदेशक मंडल उनकी पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि अंतिम फैसला भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी के बाद ही होगा।
शशिधर जगदीशन का मौजूदा कार्यकाल अक्टूबर 2026 में समाप्त हो रहा है। ऐसे में बैंक ने उनके नेतृत्व को जारी रखने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। पिछले कुछ महीनों से बैंक कानूनी जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा था, जिसके कारण पुनर्नियुक्ति और नए गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया में देरी हुई। अब जांच पूरी होने के बाद दोनों प्रक्रियाओं में तेजी आने की संभावना है।
एचडीएफसी बैंक ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि दो स्वतंत्र कानूनी संस्थाओं ने उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित लोगों के बयानों की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान पूर्व अध्यक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं मिला। बैंक के अनुसार रिकॉर्ड और गवाहों के बयान आरोपों से मेल नहीं खाते, इसलिए उन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी।
बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिपोर्ट से शशिधर जगदीशन की स्थिति पहले से अधिक मजबूत हुई है। उनका कहना है कि निदेशक मंडल ने पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत अपनाई थी और ऐसे में केवल सीईओ को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। इससे उनके तीसरे कार्यकाल की संभावना काफी बढ़ गई है।
शशिधर जगदीशन पहले भी कह चुके हैं कि यदि निदेशक मंडल उन्हें दोबारा जिम्मेदारी सौंपना चाहता है तो वह इसके लिए तैयार हैं। हालांकि उनकी नियुक्ति पर अंतिम मुहर भारतीय रिजर्व बैंक ही लगाएगा। माना जा रहा है कि आरबीआई कानूनी जांच के अलावा बैंक के प्रदर्शन, प्रबंधन क्षमता और एचडीएफसी लिमिटेड के विलय के बाद की स्थिति का भी मूल्यांकन करेगा।
इसी बीच बैंक के नए गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया भी जारी है। जानकारी के अनुसार आरबीआई के पूर्व उप-गवर्नर राजेश्वर राव उन प्रमुख नामों में शामिल हैं, जिन पर बैंक की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति विचार कर रही है। निदेशक मंडल इनमें से तीन नाम अंतिम मंजूरी के लिए आरबीआई को भेज सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2023 में एचडीएफसी लिमिटेड और एचडीएफसी बैंक के विलय के बाद बैंक के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोन-टू-डिपॉजिट अनुपात को संतुलित करना रही है। बड़ी मात्रा में आवास ऋण बैंक में शामिल होने के कारण यह अनुपात बढ़ गया था, जिसे सामान्य स्तर पर लाना अभी भी बैंक की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
विश्लेषकों का यह भी मानना है कि बैंक के पास मजबूत नेतृत्व टीम मौजूद है और वरिष्ठ अधिकारी कैजाद भरूचा जैसे अनुभवी विकल्प भी उपलब्ध हैं। इसके बावजूद मौजूदा परिस्थितियों में शशिधर जगदीशन को तीसरा कार्यकाल मिलने की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है।
अब पूरे बैंकिंग सेक्टर की नजर भारतीय रिजर्व बैंक के अंतिम फैसले पर टिकी है। आरबीआई की मंजूरी के बाद ही यह तय होगा कि देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक का नेतृत्व अगले कार्यकाल में भी शशिधर जगदीशन के हाथों में रहेगा या बैंक को नया नेतृत्व मिलेगा।
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