दिल्ली सरकार ने राजधानी की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और उन्हें पर्यटन के लिहाज से बेहतर बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जानकारी दी कि सरकार ने ‘हमारे स्मारक, हमारा गौरव’ अभियान के तहत दो महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दे दी है। इस पहल का उद्देश्य दिल्ली की ऐतिहासिक विरासत को जनभागीदारी के माध्यम से संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है।
नई योजना के तहत दिल्ली के 75 ऐतिहासिक स्मारकों को अगले पांच वर्षों के लिए निजी कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU), ट्रस्ट और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) को ‘स्मारक मित्र’ के रूप में गोद लेने की अनुमति दी जाएगी। इन संस्थाओं की जिम्मेदारी स्मारकों के संरक्षण, रखरखाव और आगंतुक सुविधाओं को बेहतर बनाने की होगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार चाहती है कि दिल्ली की ऐतिहासिक पहचान को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ा जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।
योजना के तहत चयनित संस्थाएं स्मारकों की साफ-सफाई, हरित क्षेत्र का विकास, प्रकाश व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था, सूचना संकेतक, पेयजल, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में सहयोग करेंगी। इससे न केवल स्मारकों की स्थिति बेहतर होगी, बल्कि पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने इस अभियान के अंतर्गत संरक्षण कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति स्मारक 2 करोड़ रुपये तक का अनुदान देने का भी प्रावधान किया है। यह राशि निर्धारित नियमों और परियोजना की आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि संरक्षण कार्य प्रभावी ढंग से पूरे किए जा सकें।
दिल्ली सरकार का मानना है कि जनभागीदारी के बिना सांस्कृतिक धरोहरों का दीर्घकालिक संरक्षण संभव नहीं है। इसलिए निजी क्षेत्र, सामाजिक संगठनों और सार्वजनिक संस्थानों की भागीदारी से ऐतिहासिक स्मारकों की देखरेख को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस योजना का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन होता है, तो इससे राजधानी के ऐतिहासिक स्थलों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आएगा। साथ ही दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने के साथ पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
दिल्ली सरकार आने वाले समय में इस अभियान के तहत स्मारकों के चयन, आवेदन प्रक्रिया और संरक्षण संबंधी दिशा-निर्देश भी जारी करेगी। इसके बाद इच्छुक संस्थाएं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन कर सकेंगी।
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