राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब बैंकिंग लेनदेन तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियां अब आरोपी कर्मचारियों और उनसे जुड़े लोगों के बैंक खातों की गहन पड़ताल कर रही हैं। इसी कड़ी में अयोध्या स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस द्वारा नोटिस भेजे जाने के बाद बैंक ने जांच में सहयोग करते हुए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई है।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने स्पष्ट किया है कि उसकी भूमिका केवल ऑनलाइन QR कोड के माध्यम से प्राप्त होने वाले दान तक सीमित है। बैंक का कहना है कि नकद चढ़ावे की गिनती, रखरखाव या उसके प्रबंधन से उसका कोई संबंध नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक बैंक जांच एजेंसियों को हर जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिलने वाले कुल दान का लगभग 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक के माध्यम से प्राप्त होता है, जबकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ट्रस्ट का प्रमुख बैंकिंग चैनल बना हुआ है।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी अविनाश शुक्ला, मनीष यादव उर्फ टिन्नू और अन्य संबंधित लोगों के बैंक खातों की जानकारी मांगी थी। बैंक ने पुष्टि की है कि अविनाश शुक्ला और मनीष यादव के खाते संबंधित शाखा में मौजूद हैं। वहीं सुप्रिया मिश्रा के नाम से इस शाखा में कोई खाता नहीं मिला है।
अब विशेष जांच दल (SIT) इन खातों की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री, बैंक स्टेटमेंट और पैसों के लेनदेन की विस्तार से जांच करेगा। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि खातों में धनराशि कहां से आई, किन खातों में भेजी गई और क्या किसी संदिग्ध वित्तीय गतिविधि के संकेत मिलते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों के बैंक खातों की जानकारी भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा में एक खाता है, जिसे कई वर्ष पहले दिल्ली से स्थानांतरित किया गया था। जानकारी के अनुसार यह खाता वर्तमान में लगभग निष्क्रिय है और इसमें बहुत कम राशि मौजूद है।
इसी शाखा में ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा का भी बैंक खाता होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने हाल ही में एक इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए लगभग 20 लाख रुपये का ऋण लिया था। हालांकि फिलहाल जांच एजेंसियां इन जानकारियों का सत्यापन कर रही हैं और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
जांच अधिकारी यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि आरोपी कर्मचारियों, उनके परिजनों और अन्य संदिग्ध लोगों के बीच किसी प्रकार का वित्तीय लेनदेन हुआ था या नहीं। यदि जांच के दौरान संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आते हैं, तो उन्हें केस का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा सकता है।
फिलहाल राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच जारी है। पुलिस और SIT बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
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